श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.92.18 
ततो भोजो नरव्याघ्रो दुर्धर्षं कुरुसत्तमम्।
अविध्यत् तूर्णमव्यग्रो दशभि: कङ्कपत्रिभि:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सिंहपुरुष कृतवर्मा ने कुरुकुल के श्रेष्ठ एवं महाबली योद्धा अर्जुन को कंकपत्रयुक्त दस बाणों द्वारा तत्काल घायल कर दिया। उस समय उन्हें तनिक भी चिन्ता नहीं हुई॥18॥
 
Then the lion-man Kritavarman instantly wounded Arjuna, the best and fiercest warrior of the Kuru clan, with ten arrows bearing Kankapatra (leaves of Kank). At that time he did not feel anxious at all.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)