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mahabharat 7.92.17: वे द्रोणाचार्य को, जो मैनाक पर्वत के समान स्थिर थे, पीछे छोड़कर कृतवर्मा और काम्बोजराज सुदक्षिण के बीच से होकर गुजरे।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.92.17 
सोऽन्तरा कृतवर्माणं काम्बोजं च सुदक्षिणम्।
अभ्ययाद् वर्जयन् द्रोणं मैनाकमिव पर्वतम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे द्रोणाचार्य को, जो मैनाक पर्वत के समान स्थिर थे, पीछे छोड़कर कृतवर्मा और काम्बोजराज सुदक्षिण के बीच से होकर गुजरे।
 
Leaving behind Dronacharya, who was as still as the Mainak mountain, they passed through the midst of Kritavarma and Kambojaraj Sudakshin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)