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mahabharat 7.92.16: द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे तीखे बाणों से बचते हुए, मुकुटधारी कुंतीपुत्र अर्जुन ने कृतवर्मा की सेना का संहार करना आरम्भ कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 92: अर्जुनका द्रोणाचार्य और कृतवर्माके साथ युद्ध करते हुए कौरव-सेनामें प्रवेश तथा श्रुतायुधका अपनी गदासे और सुदक्षिणका अर्जुनद्वारा वध  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.92.16 
वर्जयन् निशितान् बाणान् द्रोणचापविनि:सृतान्।
किरीटमाली कौन्तेयो भोजानीकं व्यशातयत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के धनुष से छूटे तीखे बाणों से बचते हुए, मुकुटधारी कुंतीपुत्र अर्जुन ने कृतवर्मा की सेना का संहार करना आरम्भ कर दिया।
 
Dodging the sharp arrows shot from Dronacharya's bow, the crown-wearing son of Kunti, Arjuna began killing Kritavarma's army.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)