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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.91.6 
तव प्रसादादिच्छेयं सिन्धुराजानमाहवे।
निहन्तुं द्विपदां श्रेष्ठ प्रतिज्ञां रक्ष मे प्रभो॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! आपकी कृपा से मैं इस युद्ध में सिंधुराज जयद्रथ का वध करना चाहता हूँ। हे प्रभु! कृपया मेरी इस प्रतिज्ञा की रक्षा करें।'
 
O best of men! With your blessings, I want to kill Sindhuraj Jayadratha in this war. Lord! Please protect this promise of mine.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)