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mahabharat 7.91.30-31h: तत्पश्चात् श्रीकृष्ण अर्जुन से इस प्रकार बोले - 'अर्जुन! अर्जुन! महाबाहो! हमें यहाँ अधिक समय नहीं लगाना चाहिए, अतः हम द्रोणाचार्य को छोड़कर आगे चलें; इस समय यही सबसे बड़ा कार्य है।'   |   mahabharat अध्याय 7.91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  7.91.30-31h 
ततोऽब्रवीद् वासुदेवो धनंजयमिदं वच:।
पार्थ पार्थ महाबाहो न न: कालात्ययो भवेत्॥ ३०॥
द्रोणमुत्सृज्य गच्छाम: कृत्यमेतन्महत्तरम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्रीकृष्ण अर्जुन से इस प्रकार बोले - 'अर्जुन! अर्जुन! महाबाहो! हमें यहाँ अधिक समय नहीं लगाना चाहिए, अतः हम द्रोणाचार्य को छोड़कर आगे चलें; इस समय यही सबसे बड़ा कार्य है।'
 
Thereafter Shri Krishna spoke to Arjuna in this manner - 'Arjuna! Arjuna! Mahabaho! We should not spend much time here, therefore, let us leave Dronacharya and move forward; this is the greatest task at this time.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)