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श्लोक  7.91.20 
पेतुरश्वसहस्राणि प्रहतान्यर्जुनेषुभि:।
हंसा हिमवत: पृष्ठे वारिविप्रहता इव॥ २०॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के बाणों से मारे गए हजारों घोड़े युद्धभूमि में उसी प्रकार पड़े थे, जैसे वर्षा के जल से घायल हुए अनेक हंस हिमालय की तलहटी में पड़े थे।
 
Thousands of horses killed by Arjun's arrows were lying on the battlefield just like many swans injured by rainwater were lying in the foothills of the Himalayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)