श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.91.18 
विसूताश्वध्वजा: पेतु: संछिन्नायुधजीविता:।
रथिनो रथमुख्येभ्य: सहसा शरपीडिता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन के बाणों से घायल होकर बहुत से रथी अपने-अपने उत्तम रथों से सहसा गिर पड़े और उनके सारथि, घोड़े, ध्वज, अस्त्र-शस्त्र और प्राण भी छूट गए॥18॥
 
Many charioteers, struck by Arjuna's arrows, suddenly fell down from the best chariots, deprived of their charioteers, horses, flags, weapons and even their lives. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)