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mahabharat 7.91.10: हे प्रजानाथ! द्रोणाचार्य को प्रणाम करके उसने क्षत्रिय धर्म का मार्ग अपनाया और पुनः उनके चरणों में नौ बाण मारे।   |   mahabharat अध्याय 7.91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 91: अर्जुन और द्रोणाचार्यका वार्तालाप तथा युद्ध एवं द्रोणाचार्यको छोड़कर आगे बढ़े हुए अर्जुनका कौरव-सैनिकोंद्वारा प्रतिरोध  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.91.10 
विव्याध चरणे द्रोणमनुमान्य विशाम्पते।
क्षत्रधर्मं समास्थाय नवभि: सायकै: पुन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! द्रोणाचार्य को प्रणाम करके उसने क्षत्रिय धर्म का मार्ग अपनाया और पुनः उनके चरणों में नौ बाण मारे।
 
O Prajanath! Paying his respects to Dronacharya, he followed the path of Kshatriya Dharma and again struck his feet with nine arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)