श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  7.90.34 
ततो दु:शासनस्त्रस्त: सहानीक: शरार्दित:।
द्रोणं त्रातारमाकाङ्क्षन् शकटव्यूहमभ्यगात्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
तब अर्जुन के बाणों से अत्यन्त पीड़ित और भयभीत होकर दु:शासन अपनी सेना सहित अपने संरक्षक द्रोणाचार्य की शरण लेने की इच्छा से शकटव्यूह में प्रवेश कर गया।
 
Then, being greatly afflicted and frightened by Arjun's arrows, Dushasan along with his army entered the Shakatvyuha, desiring to take refuge under his protector Dronacharya.
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि दु:शासनसैन्यपराभवे नवतितमोऽध्याय:॥ ९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें दु:शासनकी सेनाका पराभवविषयक नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)