श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  7.90.3-4 
संजय उवाच
तथार्जुनेन सम्भग्ने तस्मिंस्तव बलेऽनघ।
हतवीरे हतोत्साहे पलायनकृतक्षणे॥ ३॥
पाकशासनिनाभीक्ष्णं वध्यमाने शरोत्तमै:।
न तत्र कश्चित् संग्रामे शशाकार्जुनमीक्षितुम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा - हे निष्पाप राजन! जब इन्द्र के पुत्र अर्जुन ने आपकी सेना के वीर सैनिकों को पूर्वोक्त प्रकार से मारकर उनका मनोबल गिरा दिया और उन्हें भागने पर विवश कर दिया, तब सभी सैनिक भागने का अवसर ढूँढ़ने लगे और उन पर निरन्तर उत्तम बाणों की मार पड़ती रही, उस समय युद्धस्थल में कोई भी अर्जुन की ओर देख भी नहीं सकता था।
 
Sanjaya said - O sinless king! When Arjuna, son of Indra, killed the brave soldiers of your army in the aforesaid manner and demoralized them and forced them to flee, all the soldiers started looking for an opportunity to flee and they were continuously being hit by the best arrows, at that time in the battle field no one could even look at Arjuna. 3-4.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)