श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.90.25 
मौर्वीं ध्वजं धनुश्चैव युगमीषां तथैव च।
रथिनां कुट्टयामास भल्लै: संनतपर्वभि:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन ने अपने मुड़े हुए भालों से सारथिओं के धनुष, ध्वज, धनुष, जूए और राजाओं के दण्ड को टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
Thereafter Arjuna, with his bent-knotted spears, broke the charioteers' bowstrings, flags, bows, yokes and the staff of kings into pieces.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)