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mahabharat 7.90.21: पृथ्वी पर गिरे हुए कुण्डलों वाले सिर कमल पुष्पों के ढेर के समान प्रतीत हो रहे थे, मानो अर्जुन ने उन सिरों के रूप में पृथ्वी पर कमल के गुच्छों को प्रस्तुत किया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.90.21 
सकुण्डलानां पततां शिरसां धरणीतले।
पद्मानामिव संघातै: पार्थश्चक्रे निवेदनम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी पर गिरे हुए कुण्डलों वाले सिर कमल पुष्पों के ढेर के समान प्रतीत हो रहे थे, मानो अर्जुन ने उन सिरों के रूप में पृथ्वी पर कमल के गुच्छों को प्रस्तुत किया हो।
 
The heads with earrings falling on the earth looked like heaps of lotus flowers, as if Arjuna had presented bunches of lotuses to the earth in the form of those heads.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)