श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.90.17 
ते गजा विशिखैस्तीक्ष्णैर्युधि गाण्डीवचोदितै:।
अनेकशतसाहस्रै: सर्वाङ्गेषु समर्पिता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
गाण्डीव धनुष से छूटे हुए लाखों तीखे बाणों ने युद्धभूमि में खड़े हुए उन हाथियों के शरीर के सभी अंगों को छेद डाला था।
 
Millions of sharp arrows shot from the Gāndīva bow had pierced all the body parts of those elephants standing on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)