Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.90.10-11: उन हाथियों को, जो अपनी लम्बी-लम्बी सूँड़ें उठाकर क्रोध में भरे हुए, पंखयुक्त पर्वतों के समान, महावतों द्वारा अंकुशों से हाँके जाते हुए बड़े वेग से अपनी ओर आते देख, नरसिंह के समान पराक्रमी अर्जुन ने जोर से गर्जना की और बिना किसी भय के अपने बाणों से शत्रुओं की गज सेना को नष्ट कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 90: अर्जुनके बाणोंसे हताहत होकर सेनासहित दु:शासनका पलायन  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  7.90.10-11 
तान् दृष्ट्वा पततस्तूणमङ्कुशैरभिचोदितान्।
व्यालम्बहस्तान् संरब्धान् सपक्षानिव पर्वतान्॥ १०॥
सिंहनादेन महता नरसिंहो धनंजय:।
गजानीकममित्राणामभीतो व्यधमच्छरै:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उन हाथियों को, जो अपनी लम्बी-लम्बी सूँड़ें उठाकर क्रोध में भरे हुए, पंखयुक्त पर्वतों के समान, महावतों द्वारा अंकुशों से हाँके जाते हुए बड़े वेग से अपनी ओर आते देख, नरसिंह के समान पराक्रमी अर्जुन ने जोर से गर्जना की और बिना किसी भय के अपने बाणों से शत्रुओं की गज सेना को नष्ट कर दिया।
 
Seeing those elephants, with their long trunks raised and filled with anger and like winged mountains, coming towards him with great speed, driven by the mahouts with the goads, Arjuna, as valiant as a lion among men, roared loudly and without any fear destroyed the enemy's elephant army with his arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)