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mahabharat 7.9.8: आज यह सुनकर कि व्याघ्रचर्म से मढ़े हुए स्वर्णमय रथ पर सवार और स्वर्णमयी टोपी (टोपी या पगड़ी) धारण करने वाले द्रोणाचार्य मारे गए हैं, मैं किसी भी प्रकार अपने शोक का निवारण नहीं कर पा रहा हूँ।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.9.8 
श्रुत्वा हतं रुक्मरथं वैयाघ्रपरिवारितम्।
जातरूपशिरस्त्राणं नाद्य शोकमपानुदे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आज यह सुनकर कि व्याघ्रचर्म से मढ़े हुए स्वर्णमय रथ पर सवार और स्वर्णमयी टोपी (टोपी या पगड़ी) धारण करने वाले द्रोणाचार्य मारे गए हैं, मैं किसी भी प्रकार अपने शोक का निवारण नहीं कर पा रहा हूँ।॥8॥
 
Today I am unable to overcome my grief in any way on hearing that Dronacharya, who was riding on a golden chariot covered with tiger skin and wearing a golden helmet (cap or turban) has been killed. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)