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न स पृष्ठमरेस्त्रासाद् रणे शौर्यात् प्रदर्शयेत्॥ ४२॥
परामप्यापदं प्राप्य स कथं निहत: परै:।
अनुवाद
जो लोग युद्धस्थल में अपने पराक्रम के कारण बड़े-बड़े कष्टों के आने पर भी शत्रुओं के भय से पीठ नहीं दिखा सकते थे, वे अपने विरोधियों द्वारा कैसे मारे गए?॥42 1/2॥
How were those who, even in the face of the greatest difficulties, could not turn their back to the enemy out of fear due to their valour in the battle field, killed by their opponents?॥ 42 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥