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mahabharat 7.9.41-42h: युद्ध में द्रोणाचार्य को उत्तम धैर्य किन योद्धाओं ने प्रदान किया था? क्या उनकी रक्षा करने वाले मूर्ख क्षत्रियों ने भयभीत होकर उन्हें युद्धभूमि में अकेला छोड़ दिया था? और क्या शत्रुओं ने उन्हें इस प्रकार निर्जन स्थान में मार डाला था?॥41 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  7.9.41-42h 
द्रोणस्य समरे वीरा: केऽकुर्वन्त परां धृतिम्।
कच्चिन्नैनं भयान्मन्दा: क्षत्रिया व्यजहन् रणे॥ ४१॥
रक्षितारस्तत: शून्ये कच्चित् तैर्न हत: परै:।
 
 
अनुवाद
युद्ध में द्रोणाचार्य को उत्तम धैर्य किन योद्धाओं ने प्रदान किया था? क्या उनकी रक्षा करने वाले मूर्ख क्षत्रियों ने भयभीत होकर उन्हें युद्धभूमि में अकेला छोड़ दिया था? और क्या शत्रुओं ने उन्हें इस प्रकार निर्जन स्थान में मार डाला था?॥41 1/2॥
 
Which warriors provided Dronacharya with the best patience in the war? Did the foolish Kshatriyas protecting him get frightened and leave him alone on the battlefield? And did the enemies kill him in this manner in a deserted manner?॥ 41 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)