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mahabharat 7.9.29-31h: पाँचवें वेद के छः अंगों सहित चारों वेदों का तथा स्थानीय इतिहास और पुराणों का अध्ययन करके वे ब्राह्मणों के लिए उसी प्रकार आश्रय बन गए थे, जैसे नदियों के लिए सागर। वे वृद्ध ब्राह्मण द्रोणाचार्य, जो शत्रुओं को संताप देते थे और ब्राह्मण तथा क्षत्रिय दोनों के कर्तव्यों का पालन करते थे, शस्त्रों द्वारा कैसे मारे गए?   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 29-31h
 
 
श्लोक  7.9.29-31h 
योऽधीत्य चतुरो वेदान् साङ्गानाख्यानपञ्चमान्॥ २९॥
ब्राह्मणानां प्रतिष्ठाऽऽसीत् स्रोतसामिव सागर:।
क्षत्रं च ब्रह्म चैवेह योऽभ्यतिष्ठत् परंतप:॥ ३०॥
स कथं ब्राह्मणो वृद्ध: शस्त्रेण वधमाप्तवान्।
 
 
अनुवाद
पाँचवें वेद के छः अंगों सहित चारों वेदों का तथा स्थानीय इतिहास और पुराणों का अध्ययन करके वे ब्राह्मणों के लिए उसी प्रकार आश्रय बन गए थे, जैसे नदियों के लिए सागर। वे वृद्ध ब्राह्मण द्रोणाचार्य, जो शत्रुओं को संताप देते थे और ब्राह्मण तथा क्षत्रिय दोनों के कर्तव्यों का पालन करते थे, शस्त्रों द्वारा कैसे मारे गए?
 
Having studied the four Vedas along with the six parts of the fifth Veda and the local history and Puranas, he had become a shelter for the Brahmins like the ocean is for the rivers. How was that old Brahmin Dronacharya killed by weapons, who used to torment the enemies and who used to perform the duties of both Brahmins and Kshatriyas?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)