श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 27-29h
 
 
श्लोक  7.9.27-29h 
तैर्वृत: सर्वत: शूर: पाञ्चाल्यापसदस्तत:॥ २७॥
केकयैश्चेदिकारूषैर्मत्स्यैरन्यैश्च भूमिपै:।
व्याकुलीकृतमाचार्यं पिपीलैरुरगं यथा॥ २८॥
कर्मण्यसुकरे सक्तं जघानेति मतिर्मम।
 
 
अनुवाद
केकय, चेदि, करुष, मत्स्यदेश और अन्यान्य भूमिपालों ने आचार्य को उसी प्रकार क्षुब्ध किया होगा, जैसे बहुत सी चींटियाँ सर्प को क्षुब्ध कर देती हैं; उसी अवस्था में उन पाण्डव सैनिकों से सब ओर से घिरे हुए उस दुष्ट धृष्टद्युम्न ने कठिन कार्य में लगे हुए द्रोणाचार्य को अवश्य मार डाला होगा; यही बात मेरे मन में आती है।।27-28 1/2।।
 
The Kekayas, Chedis, Karushas, ​​Matsyadeshas and other land-keepers must have agitated the Acharya like a lot of ants agitate a snake; in the same condition, surrounded on all sides by those Pandava soldiers, the wretched Dhrishtadyumna must have killed Dronacharya who was engaged in a difficult task; this is what comes to my mind. 27-28 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)