श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.9.19-20h 
हया: पराजिता: शीघ्रा भारद्वाजरथोद्वहा:।
ते स्म रुक्मरथे युक्ता नरवीरसमास्थिता:॥ १९॥
कथं नाभ्यतरंस्तात पाण्डवानामनीकिनीम्।
 
 
अनुवाद
क्या द्रोणाचार्य के रथ को खींचने वाले वे वेगशाली घोड़े पराजित हो गए थे ? हे प्रभु ! द्रोणाचार्य के स्वर्णमय रथ में जुते हुए और उन पराक्रमी आचार्य की सवारी के लिए प्रयुक्त होने वाले वे घोड़े पाण्डव सेना पर विजय कैसे न पा सके ?॥19 1/2॥
 
Were those swift horses pulling Dronacharya's chariot defeated? O dear! How could those horses harnessed to Dronacharya's golden chariot and used for the ride of that valiant Acharya not overcome the Pandava army?॥19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)