हया: पराजिता: शीघ्रा भारद्वाजरथोद्वहा:।
ते स्म रुक्मरथे युक्ता नरवीरसमास्थिता:॥ १९॥
कथं नाभ्यतरंस्तात पाण्डवानामनीकिनीम्।
अनुवाद
क्या द्रोणाचार्य के रथ को खींचने वाले वे वेगशाली घोड़े पराजित हो गए थे ? हे प्रभु ! द्रोणाचार्य के स्वर्णमय रथ में जुते हुए और उन पराक्रमी आचार्य की सवारी के लिए प्रयुक्त होने वाले वे घोड़े पाण्डव सेना पर विजय कैसे न पा सके ?॥19 1/2॥
Were those swift horses pulling Dronacharya's chariot defeated? O dear! How could those horses harnessed to Dronacharya's golden chariot and used for the ride of that valiant Acharya not overcome the Pandava army?॥19 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)