श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  7.9.14-15h 
मन्दानां मम पुत्राणां जयाशा यस्य विक्रमे॥ १४॥
बृहस्पत्युशनस्तुल्यो बुद्धॺा स निहत: कथम्।
 
 
अनुवाद
जिनके पराक्रम पर विजय की आशा टिकी थी और जो बृहस्पति और शुक्राचार्य के समान बुद्धिमान थे, वे मेरे मूर्ख पुत्रों द्वारा कैसे मारे गए?॥14 1/2॥
 
How was Dronacharya, on whose valour the hope of victory rested, and who was equal in wisdom to Brihaspati and Shukracharaya, killed by my foolish sons?॥ 14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)