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mahabharat 7.9.12-13h: युद्धभूमि में द्रोण का मारा जाना समुद्र के सूख जाने, मेरु पर्वत के हिल जाने और सूर्य के आकाश से गिर जाने के समान है। मैं इसे किसी भी प्रकार सहन नहीं कर सकता ॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 9: द्रोणाचार्यकी मृत्युका समाचार सुनकर धृतराष्ट्रका शोक करना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.9.12-13h 
शोषणं सागरस्येव मेरोरिव विसर्पणम्॥ १२॥
पतनं भास्करस्येव न मृष्ये द्रोणपातनम्।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में द्रोण का मारा जाना समुद्र के सूख जाने, मेरु पर्वत के हिल जाने और सूर्य के आकाश से गिर जाने के समान है। मैं इसे किसी भी प्रकार सहन नहीं कर सकता ॥12 1/2॥
 
Drona being killed on the battlefield is like the ocean drying up, Mount Meru moving and the Sun falling from the sky. I cannot bear it in any way. ॥12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)