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mahabharat 7.89.8: सब ओर बिखरे हुए योद्धाओं के मुख कटकर गिरे हुए कमल-गुच्छों के समान सुन्दर लगने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.89.8 
पुण्डरीकवनानीव विध्वस्तानि समन्तत:।
विनिकीर्णानि योधानां वदनानि चकाशिरे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
सब ओर बिखरे हुए योद्धाओं के मुख कटकर गिरे हुए कमल-गुच्छों के समान सुन्दर लगने लगे।
 
The faces of the warriors scattered everywhere began to look beautiful like clusters of lotuses that had fallen after being cut. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)