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mahabharat 7.89.4: तत्पश्चात् अर्जुन बाणों की वर्षा करते हुए वर्षा करने वाले मेघ के समान प्रकट हुए। जैसे मेघ जल बरसाकर पर्वतों को ढक लेता है, वैसे ही अर्जुन ने बाणों की वर्षा से शत्रुओं को ढक दिया।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.89.4 
तत: सायकवर्षेण पर्जन्य इव वृष्टिमान्।
परानवाकिरत् पार्थ: पर्वतानिव नीरद:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् अर्जुन बाणों की वर्षा करते हुए वर्षा करने वाले मेघ के समान प्रकट हुए। जैसे मेघ जल बरसाकर पर्वतों को ढक लेता है, वैसे ही अर्जुन ने बाणों की वर्षा से शत्रुओं को ढक दिया।॥4॥
 
Thereafter Arjuna, showering arrows, appeared like a rain-bearing cloud. Just as a cloud showers water and covers the mountains, Arjuna covered the enemies with his shower of arrows. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)