Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.89.32: अन्य हाथी-सवार सैनिक हाथियों को अपने पैरों और अंकुशों से हांकते हुए युद्धभूमि से भाग रहे थे। बहुत से योद्धा अर्जुन के बाणों से मोहित होकर उसके आगे-आगे जा रहे थे। उस समय आपके समस्त योद्धाओं का उत्साह नष्ट हो गया और उनके मन में महान् भय उत्पन्न हो गया॥ 32॥ | mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्य हाथी-सवार सैनिक हाथियों को अपने पैरों और अंकुशों से हांकते हुए युद्धभूमि से भाग रहे थे। बहुत से योद्धा अर्जुन के बाणों से मोहित होकर उसके आगे-आगे जा रहे थे। उस समय आपके समस्त योद्धाओं का उत्साह नष्ट हो गया और उनके मन में महान् भय उत्पन्न हो गया॥ 32॥
The other elephant-riding soldiers were fleeing from the battlefield, driving the elephants with their toes and goads. Many warriors were fascinated by Arjun's arrows and were going in front of him. At that time, the enthusiasm of all your warriors was destroyed and a great panic arose in their minds.॥ 32॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि अर्जुनयुद्धे एकोननवतितमोऽध्याय:॥ ८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें अर्जुनयुद्धविषयक नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥