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mahabharat 7.89.27: जैसे मध्यान्ह के सूर्य को देखना समस्त प्राणियों के लिए सदैव कठिन होता है, उसी प्रकार उस युद्धस्थल में शत्रुओं के लिए क्रोधित अर्जुन को देखना अत्यन्त कठिन था॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.89.27 
यथा मध्यन्दिने सूर्यो दुष्प्रेक्ष्य: प्राणिभि: सदा।
तथा धनंजय: क्रुद्धो दुष्प्रेक्ष्यो युधि शत्रुभि:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जैसे मध्यान्ह के सूर्य को देखना समस्त प्राणियों के लिए सदैव कठिन होता है, उसी प्रकार उस युद्धस्थल में शत्रुओं के लिए क्रोधित अर्जुन को देखना अत्यन्त कठिन था॥ 27॥
 
Just as it is always difficult for all living beings to look at the midday sun, similarly on that battlefield it was very difficult for the enemies to look at the enraged Arjuna.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)