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mahabharat 7.89.21: वहाँ अर्जुन निरन्तर चलते हुए रथ का मार्ग इस प्रकार खींच रहे थे कि उस समय कोई भी उन पर धनुष से प्रहार करने का किंचितमात्र भी अवसर न देख सकता था ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  7.89.21 
नृत्यतो रथमार्गेषु धनुर्व्यायच्छतस्तथा।
न कश्चित् तत्र पार्थस्य ददृशेऽन्तरमण्वपि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अर्जुन निरन्तर चलते हुए रथ का मार्ग इस प्रकार खींच रहे थे कि उस समय कोई भी उन पर धनुष से प्रहार करने का किंचितमात्र भी अवसर न देख सकता था ॥ 21॥
 
There Arjuna was constantly moving and pulling the chariot's path in such a way that at that time no one could see even the slightest opportunity to attack him with his bow. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)