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mahabharat 7.89.15: अन्य अनेक सैनिक एक-दूसरे पर तथा स्वयं पर आक्रमण करने लगे। काल से मोहित होकर वे सम्पूर्ण जगत को अर्जुनरूप समझने लगे।   |   mahabharat अध्याय 7.89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 89: अर्जुनके द्वारा दुर्मर्षणकी गजसेनाका संहार और समस्त सैनिकोंका पलायन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.89.15 
अन्योन्यमपि चाजघ्नुरात्मानमपि चापरे।
पार्थभूतममन्यन्त जगत‍् कालेन मोहिता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अन्य अनेक सैनिक एक-दूसरे पर तथा स्वयं पर आक्रमण करने लगे। काल से मोहित होकर वे सम्पूर्ण जगत को अर्जुनरूप समझने लगे।
 
Many other soldiers started attacking each other and themselves. Fascinated by time, they started considering the whole world as Arjuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)