Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.88.6: उत्पन्न हुए महान भय के कारण हजारों जलती हुई उल्काएं भयंकर गर्जना के साथ आकाश से गिरने लगीं और सम्पूर्ण पृथ्वी कांपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  7.88.6 
सनिर्घाता ज्वलन्त्यश्च पेतुरुल्का: सहस्रश:।
चचाल च मही कृत्स्ना भये घोरे समुत्थिते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उत्पन्न हुए महान भय के कारण हजारों जलती हुई उल्काएं भयंकर गर्जना के साथ आकाश से गिरने लगीं और सम्पूर्ण पृथ्वी कांपने लगी।
 
Due to the great fear that arose, thousands of burning meteors began falling from the sky with a terrible roar and the entire earth began to tremble.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)