नाना प्रकार के युद्ध-वायद्रव्यों की ध्वनि, गर्जना, नगाड़ों की ध्वनि, सिंह की गर्जना और रथियों की चिंघाड़, ये सब मिलकर भयंकर हो गईं और भयभीत मनुष्यों के हृदय में भय उत्पन्न करने लगीं। उस समय इन्द्रपुत्र अर्जुन ने बड़े हर्ष में भरकर भगवान श्रीकृष्ण से कहा॥28-29॥
The sounds of various types of war instruments, the roaring sounds, the beating of drums, the lion's roar and the shouts of the charioteers, all of them together became terrifying and started instilling fear in the hearts of fearful men. At that time, Indra's son Arjuna, filled with great joy, said to Lord Krishna. 28-29॥
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि अर्जुनरणप्रवेशे अष्टाशीतितमोऽध्याय:॥ ८८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेशविषयक अठासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८८॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३० श्लोक हैं।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)