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mahabharat 7.88.26: तत्पश्चात, अर्जुन की ध्वजा में स्थित भूतगणों के साथ वहाँ बैठे हुए हनुमानजी ने अपना मुख खोलकर बड़े जोर से गर्जना की और आपके सैनिकों को भयभीत कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.88.26 
तत: कपिर्महानादं सह भूतैर्ध्वजालयै:।
अकरोद् व्यादितास्यश्च भीषयंस्तव सैनिकान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात, अर्जुन की ध्वजा में स्थित भूतगणों के साथ वहाँ बैठे हुए हनुमानजी ने अपना मुख खोलकर बड़े जोर से गर्जना की और आपके सैनिकों को भयभीत कर दिया।
 
Thereafter, Hanumanji, sitting there along with the ghosts residing in Arjun's flag, roared loudly, opening his face and frightening your soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)