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mahabharat 7.88.23: जैसे गड़गड़ाहट की ध्वनि से सभी प्राणी भयभीत हो जाते हैं, उसी प्रकार उन दोनों वीरों के शंखों की ध्वनि से आपके सभी सैनिक भयभीत हो गए॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 88: कौरव-सेनाके लिये अपशकुन, दुर्मर्षणका अर्जुनसे लड़नेका उत्साह तथा अर्जुनका रणभूमिमें प्रवेश एवं शंखनाद  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.88.23 
यथा त्रस्यन्ति भूतानि सर्वाण्यशनिनि:स्वनात्।
तथा शङ्खप्रणादेन वित्रेसुस्तव सैनिका:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जैसे गड़गड़ाहट की ध्वनि से सभी प्राणी भयभीत हो जाते हैं, उसी प्रकार उन दोनों वीरों के शंखों की ध्वनि से आपके सभी सैनिक भयभीत हो गए॥ 23॥
 
Just as the sound of thunder terrifies all creatures, similarly the sound of the conches blown by those two heroes terrified all your soldiers.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)