| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण » श्लोक 34 |
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| | | | श्लोक 7.87.34  | बहुरथमनुजाश्वपत्तिनागं
प्रतिभयनि:स्वनमद्भुतानुरूपम्।
अहितहृदयभेदनं महद् वै
शकटमवेक्ष्य कृतं ननन्द राजा॥ ३४॥ | | | | | | अनुवाद | | उस अद्भुत एवं समयानुकूल महान शक्तिव्यूह को देखकर, जो अनेक रथों, पैदल सैनिकों, घोड़ों और हाथियों से युक्त, भयंकर शब्द करने वाला तथा शत्रुओं के हृदय को छेदने में समर्थ था, राजा दुर्योधन बहुत प्रसन्न हुआ ॥34॥ | | | | Seeing that great Shakti-vyuha, which was wonderful and timely, filled with many chariots, foot soldiers, horses and elephants, making a terrible noise and capable of piercing the hearts of the enemies, king Duryodhana was very pleased. ॥ 34॥ | | | इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि कौरवव्यूहनिर्माणे सप्ताशीतितमोऽध्याय:॥ ८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें कौरव-सेनाके व्यूहका निर्माणविषयक सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८७॥
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