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mahabharat 7.87.33: उस समय समस्त प्राणी यह ​​मानने लगे कि यह व्यूह पर्वतों, समुद्रों, वनों और अनेक जनपदों से युक्त सम्पूर्ण पृथ्वी को निगल जाएगा ॥ 33॥   |   mahabharat अध्याय 7.87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.87.33 
सशैलसागरवनां नानाजनपदाकुलाम्।
ग्रसेद् व्यूह: क्षितिं सर्वामिति भूतानि मेनिरे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उस समय समस्त प्राणी यह ​​मानने लगे कि यह व्यूह पर्वतों, समुद्रों, वनों और अनेक जनपदों से युक्त सम्पूर्ण पृथ्वी को निगल जाएगा ॥ 33॥
 
At that time all beings began to believe that this Vyuha will devour the whole earth filled with mountains, oceans, forests and numerous districts. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)