vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण
»
श्लोक 32
श्लोक
7.87.32
सिद्धचारणसंघानां विस्मय: सुमहानभूत्।
द्रोणेन विहितं दृष्ट्वा व्यूहं क्षुब्धार्णवोपमम्॥ ३२॥
अनुवाद
द्रोणाचार्य द्वारा रचित वह विशाल संरचना उत्प्लावनशील समुद्र के समान प्रतीत हो रही थी। उसे देखकर सिद्धों और चारणों के समूह अत्यन्त विस्मित हो गये। 32.
That great formation created by Dronacharya looked like a turbulent ocean. Seeing it, the groups of Siddhas and Charanas were greatly astonished. 32.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×