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श्लोक  7.87.32 
सिद्धचारणसंघानां विस्मय: सुमहानभूत्।
द्रोणेन विहितं दृष्ट्वा व्यूहं क्षुब्धार्णवोपमम्॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य द्वारा रचित वह विशाल संरचना उत्प्लावनशील समुद्र के समान प्रतीत हो रही थी। उसे देखकर सिद्धों और चारणों के समूह अत्यन्त विस्मित हो गये। 32.
 
That great formation created by Dronacharya looked like a turbulent ocean. Seeing it, the groups of Siddhas and Charanas were greatly astonished. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)