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mahabharat 7.87.31: उस समय ध्वजाओं से सुशोभित, काले मृगचर्म से बनी वेदी और ध्वजा से युक्त तथा लाल घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले द्रोणाचार्य के रथ को देखकर समस्त कौरव बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 7.87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.87.31 
पताकिनं शोणहयं वेदिकृष्णाजिनध्वजम्।
द्रोणस्य रथमालोक्य प्रहृष्टा: कुरवोऽभवन्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
उस समय ध्वजाओं से सुशोभित, काले मृगचर्म से बनी वेदी और ध्वजा से युक्त तथा लाल घोड़ों द्वारा खींचे जाने वाले द्रोणाचार्य के रथ को देखकर समस्त कौरव बहुत प्रसन्न हुए।
 
At that time, on seeing Dronacharya's chariot, decorated with banners and bearing the altar and a flag made of black deerskin and drawn by red horses, all the Kauravas became very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)