श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.87.23 
नानानृपतिभिर्वीरैस्तत्र तत्र व्यवस्थितै:।
रथाश्वगजपत्त्योघैर्द्रोणेन विहित: स्वयम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य ने स्वयं अनेक राजाओं तथा इधर-उधर खड़े हुए हाथी सवारों, घुड़सवारों, रथियों और पैदल सैनिकों की सहायता से उस व्यूह का निर्माण किया।
 
Dronacharya himself formed that formation with the help of many kings and elephant riders, horse riders, charioteers and infantry soldiers standing here and there. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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