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श्लोक 7.87.22  |
दीर्घो द्वादश गव्यूति: पश्चार्धे पञ्च विस्तृत:।
व्यूहस्तु चक्रशकटो भारद्वाजेन निर्मित:॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| आचार्य द्रोण ने चक्रगर्भ शकटव्यूह की रचना की थी, जिसकी लम्बाई बारह गव्यूति (चौबीस कोस) तथा पृष्ठ भाग की चौड़ाई पाँच गव्यूति (दस कोस) थी। |
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| Acharya Drona had created Chakragarbha Shakatvyuha, whose length was twelve gavyuti (twenty four kos) and the width of the rear portion was five gavyuti (ten kos). |
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