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mahabharat 7.87.19-20: आपका पुत्र दुर्मर्षण डेढ़ हजार भयंकर शस्त्रधारी हाथियों के साथ, भयंकर आकृति और पराक्रम से युक्त, युद्ध में कुशल हाथियों पर आरूढ़ होकर सम्पूर्ण सेना के सामने युद्ध के लिए तैयार खड़ा था।   |   mahabharat अध्याय 7.87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 87: कौरव-सैनिकोंका उत्साह तथा आचार्य द्रोणके द्वारा चक्रशकटव्यूहका निर्माण  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  7.87.19-20 
मत्तानां सुविरूढानां हस्त्यारोहैर्विशारदै:।
नागानां भीमरूपाणां वर्मिणां रौद्रकर्मिणाम्॥ १९॥
अध्यर्धेन सहस्रेण पुत्रो दुर्मर्षणस्तव।
अग्रत: सर्वसैन्यानां युध्यमानो व्यवस्थित:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आपका पुत्र दुर्मर्षण डेढ़ हजार भयंकर शस्त्रधारी हाथियों के साथ, भयंकर आकृति और पराक्रम से युक्त, युद्ध में कुशल हाथियों पर आरूढ़ होकर सम्पूर्ण सेना के सामने युद्ध के लिए तैयार खड़ा था।
 
Accompanied by one and a half thousand fiercely armed elephants, with fierce features and valour, mounted on skilled war-ridden elephants, your son Durmarshan stood before the entire army, ready for battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)