vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ
»
श्लोक 5
श्लोक
7.86.5
युद्धकाले पुन: प्राप्ते तदैव भवता यदि।
निवर्तिता: स्यु: संरब्धा न त्वां व्यसनमाव्रजेत्॥ ५॥
अनुवाद
फिर जब युद्ध का समय आया, तो यदि आपने क्रोध में भरे हुए अपने पुत्रों को बलपूर्वक रोक दिया होता, तो यह विपत्ति आप पर नहीं आती।
Then when the time for war came, if you had forcefully stopped your sons who were filled with anger, then this calamity would not have befallen you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×