श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.86.22 
यावत् तु शक्यते कर्तुमन्तरज्ञैर्जनाधिपै:।
क्षत्रधर्मरतै: शूरैस्तावत् कुर्वन्ति कौरवा:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कौरव राजा क्षत्रिय राजाओं के समान ही वीरता दिखाते हैं, जो अवसर को जानते हैं, धर्म में तत्पर हैं और वीर हैं॥ 22॥
 
The Kaurava kings display as much valour as the Kshatriya kings, who know the opportunity and are devoted to the Dharma, and who are valiant.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)