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mahabharat 7.86.17: हे मनुष्यों के स्वामी! आज जब युद्ध का अवसर आया है, तब आप अपने पुत्रों के नाना प्रकार के दोष बताकर उनकी निन्दा कर रहे हैं; यह इस समय आपको शोभा नहीं देता॥17॥   |   mahabharat अध्याय 7.86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 86: संजयका धृतराष्ट्रको उपालम्भ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.86.17 
यत् पुनर्युद्धकाले त्वं पुत्रान् गर्हयसे नृप।
बहुधा व्याहरन् दोषान् न तदद्योपपद्यते॥ १७॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! आज जब युद्ध का अवसर आया है, तब आप अपने पुत्रों के नाना प्रकार के दोष बताकर उनकी निन्दा कर रहे हैं; यह इस समय आपको शोभा नहीं देता॥17॥
 
O lord of men! Today, when the occasion of war has come, you are criticising your sons by pointing out their various faults; this does not befit you at this time.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)