श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  7.85.52 
किन्नु दुर्योधन: कृत्यं कर्ण: कृत्यं किमब्रवीत्।
दु:शासन: सौबलश्च तेषामेवं गतेष्वपि॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने उसकी ऐसी अवस्था होने पर भी उसे कौन-सा कर्तव्य सौंपा? कर्ण, दु:शासन और शकुनि ने उसे क्या करने की सलाह दी?॥ 52॥
 
What duty did Duryodhana decide upon him despite his condition being so? What did Karna, Dushasan and Shakuni advise him to do?॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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