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mahabharat 7.85.51: तत्पश्चात्, गाण्डीवधारी अर्जुन का बड़ा अहित करने के कारण मेरे पुत्र युद्ध में उसके पराक्रम को कभी सहन नहीं कर सकेंगे।   |   mahabharat अध्याय 7.85: धृतराष्ट्रका विलाप   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.85.51 
न जातु तस्य कर्माणि युधि गाण्डीवधन्वन:।
अपकृत्य महत् तात सोढुं शक्ष्यन्ति मामका:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, गाण्डीवधारी अर्जुन का बड़ा अहित करने के कारण मेरे पुत्र युद्ध में उसके पराक्रम को कभी सहन नहीं कर सकेंगे।
 
Tat! Having done a great disservice to Gandiva-wearing Arjuna, my sons will never be able to tolerate his bravery in battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)