श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  7.85.50 
यदुपायात सायाह्ने कृत्वा पार्थस्य किल्बिषम्।
अभिमन्यौ हते तात कथमासीन्मनो हि व:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री ! जब आप अभिमन्यु को मारकर अर्जुन के प्रति महान अपराध करके सायंकाल शिविर में लौटे, उस समय आपकी मनःस्थिति क्या थी ? ॥50॥
 
Father! When you returned to the camp in the evening after committing a great crime against Arjun by killing Abhimanyu, what was the state of your mind at that time? ॥ 50॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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