श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.85.5 
किं नु संजय संग्रामे वृत्तं दुर्योधनं प्रति।
परिदेवो महानद्य श्रुतो मे नाभिनन्दनम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
संजय! युद्धभूमि में दुर्योधन को क्या हो गया है? इन दिनों मैंने घोर विलाप की ध्वनि सुनी है। हर्षोल्लास या आनंद का कोई स्वर नहीं सुना।
 
Sanjay! What has happened to Duryodhan on the battlefield? These days I have heard the sound of great lamentation. I have not heard the sounds of merriment or enjoyment.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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