श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 39-42
 
 
श्लोक  7.85.39-42 
वृकोदरार्जुनौ यत्र वृष्णिवीरश्च सात्यकि:।
उत्तमौजाश्च पाञ्चाल्यो युधामन्युश्च दुर्जय:॥ ३९॥
धृष्टद्युम्नश्च दुर्धर्ष: शिखण्डी चापराजित:।
अश्मका: केकयाश्चैव क्षत्रधर्मा च सौमकि:॥ ४०॥
चैद्यश्च चेकितानश्च पुत्र: काश्यस्य चाभिभू:।
द्रौपदेया विराटश्च द्रुपदश्च महारथ:॥ ४१॥
यमौ च पुरुषव्याघ्रौ मन्त्री च मधुसूदन:।
क एताञ्जातु युध्येत लोकेऽस्मिन् वै जिजीविषु:॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
किस पक्ष में हैं भीमसेन, अर्जुन, वृष्णिवीर सात्यकि, पांचालवीर उत्तमौजा, दुर्ग युधामन्यु, दुर्धर्ष धृष्टद्युम्न, अपराजित वीर शिखंडी, अश्मक, केकयराजकुमार, सोमकपुत्र क्षात्रधर्मा, चेदिराज धृष्टकेतु, चेकितान, काशीराज के पुत्र अभीभू, द्रौपदी के पांचों पुत्र, राजा विराट और महारथी द्रुपद, जहां पुरुष सिंह हैं वहां नकुल, सहदेव और हैं मंत्र दाता मधुसूदन, इस संसार में ऐसा कोई वीर नहीं है जो जीवित रहने की इच्छा से इन वीरों से युद्ध करे। 39-42॥
 
In which side are Bhimsen, Arjun, Vrishnivir Satyaki, Panchalvir Uttamauja, Durga Yudhamanyu, Durdharsha Dhrishtadyumna, undefeated brave Shikhandi, Ashmaka, Kekayrajkumar, Somakputra Kshatradharma, Chediraj Dhrishtaketu, Chekitana, Kashiraj's son Abhibhu, Draupadi's five sons, King Virat and Maharathi Drupada, where Purusha Singh is There is Nakul, Sahadev and the mantra giver Madhusudan, there is no such brave man in this world who would ever fight with these brave men with the desire to stay alive. 39-42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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