श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.85.33 
नियुज्यमाना: स्थास्यन्ति पाण्डवा धर्मवर्त्मनि।
सन्ति मे ज्ञातयस्तात येषां श्रोष्यन्ति पाण्डवा:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! यदि पाण्डवों को आज्ञा दी जाए, तो वे उसका पालन करेंगे और धर्म के मार्ग पर सदैव दृढ़ रहेंगे। मेरे ऐसे बहुत से भाई और सम्बन्धी हैं, जिनकी बातें पाण्डव मानेंगे॥ 33॥
 
Father! If the Pandavas are given orders, they will obey them and will always remain steadfast on the path of Dharma. I have many such brothers and relatives, whose words the Pandavas will listen to.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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