श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.85.32 
अर्हास्ते पृथिवीं भोक्तुं समर्था: साधनेऽपि च।
तेषामपि समुद्रान्ता पितृपैतामही मही॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव पृथ्वी का राज्य भोगने में समर्थ हैं और उसे प्राप्त करने में भी समर्थ हैं। समुद्रपर्यन्त यह पृथ्वी भी उनके पूर्वजों की है॥ 32॥
 
‘The Pandavas are capable of enjoying the kingdom of the earth and also of acquiring it. This earth up to the sea belongs to their forefathers as well.॥ 32॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd