श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 85: धृतराष्ट्रका विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.85.28 
शल्यो भूरिश्रवाश्चैव पुरुमित्रो जयस्तथा।
अश्वत्थामा कृपो द्रोणो द्यूतं नेच्छन्ति संजय॥ २८॥
 
 
अनुवाद
संजय! शल्य, भूरिश्रवा, पुरुमित्र, जय, अश्वत्थामा, कृपाचार्य और द्रोणाचार्य भी नहीं चाहते थे कि जुआ खेला जाए।॥ 28॥
 
Sanjaya! Shalya, Bhurishrava, Purumitra, Jai, Ashwatthama, Krupacharya and Dronacharya also did not want the gambling to take place.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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